Anilkumar Rathwa (Sameer) 19 Sep 2025 कविताएँ समाजिक किसान 12665 0 Hindi :: हिंदी
मित्रों! वो सूरज से पहले उठता है, धरती माँ के माथे का पसीना बनता है। ना महलों का मालिक है, ना दौलत का आशिक है, फिर भी दुनिया का अन्नदाता है – हाँ! वही किसान सच्चा राजा है! जिसकी हथेली छालों से भरी, जिसकी आँखों में उम्मीदें ठहरी। जो मिट्टी को सोना बना दे, जो भूखों को जीवन दे। वो खेतों का वीर जवान है, देश की साँसों का सम्मान है। सोचो… अगर उसका हल थम जाएगा, तो सभ्यता का रथ रुक जाएगा। शहरों के बाजार सूख जाएँगे, जीवन के गीत अधूरे रह जाएँगे। इसलिए मैं कहता हूँ – ताजमहल से बड़ा है उसका खेत, क्योंकि वहाँ रोटी की नींव रखी जाती है। वो हर फसल में ईश्वर बोता है, और हर दाने में जिंदगी जगाता है। मित्रों! ताली बजाओ… क्योंकि ये सम्मान किसान का है। वंदन करो… क्योंकि ये अभिमान किसान का है। जो भूखा रहकर भी सबको खिलाता है, सच मानो – धरती पर भगवान कहलाता है! किसान अमर है! किसान महान है!