मोती लाल साहु 13 Jun 2023 शायरी समाजिक या खुदा- तुम्हारा दीदार- चाहता हूं अब, सहारा और ज़िक्र चाहता हूं- जमाने की ठोकरें- कहां तक सह पाऊंगा- इसलिए- अब सरेआम चाहता हूं। 41167 0 Hindi :: हिंदी
..तुम्हारा दीदार चाहता हूं- सहारा और ज़िक्र चाहता हूं..अब,, ..जमाने की ठोकरें- कहां तक सह पाऊंगा..अब,, ..इसलिए- तुझे सरेआम चाहता हूं..अब,, ..या खुदा- तुम्हारा दीदार चाहता हूं अब....!!!! -मोती