मोती लाल साहु 19 Jun 2023 शायरी समाजिक # क्या रिझने लगे हो #कुछ भी नहीं को देख-देख #यह नयन पलट कर देखो #जीवन का वह नूर #खुद के अंदर ख़ुदा दिखेगा। 43675 0 Hindi :: हिंदी
क्या रीझने लगे हो- कुछ भी नहीं को देख-देख,, यह नयन- पलट कर देखो, जीवन का वह नूर ख़ुद के अंदर ख़ुदा दिखेगा....!! -मोती