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पहला रंग- 18/2/2023 बाबु ने कुछ लजाकर, कुछ इठलाकर अपने सोहना बाबू से पूछा - मेरे सोहना, मेरे बाबु, मुझे नया आईफोन कब दिलवाएंगे। सोहना बाबु पह read more >>
कुछ, बदनामियों के से दाग है । हम पर ये गलतीयाँ है। उन वफा की जो, यारों अब, हमें छुती नहीं । बदल से गए अंदाज, यहाँ जमाने के बिंदास रहने व read more >>
कविता-पत्नी से पंगा! रचना- जितेन्द्र शर्मा। तिथी- 13/02/2023 बेशक मैं कुल का वाहक हूं, वो दो दो कुल की प्यारी है। समय न पढ़ पाया जिसको, उलझी ह read more >>
एक दिन हम पहुचे न्यायलय बनवाने एक प्रमाण पत्र वहा पर कुछ लोग काले कोट मे घूम रहे थे यत्र तत्र वहा पर बनी थी बहुत सारी कुटी जह� read more >>
स्टेशन में बैठा मै बड़े चाव से मोबाइल चला रहा था और बगल में बैठा एक लड़का मुझे घूरे जा रहा था में उठ गया कि शायद मेरी वजह से उसे कोई समस� read more >>
डाल को घमंड हो गया की पक्षी मूझ पे बैठी है पागल को कोई कहो कि वह भी शाखा से जुड़ी है read more >>
स्वरचित रचना---छछन्दी औरत/ चतुर नार चालीसा! ‌ संदर्भ---हास्य-व्यंग ! दोहा--- श्री, मणि, रम्भा, वारूणी, अमिय, शंख, गजराज! कल्पद्रुम, धनु, धेन� read more >>
स्वरचित रचना---काव कही कुछ कहि न जावे! संदर्भ--- हास्य व्यंग (समसामयिक) काव कही कुछ कहि न जावै, ढ़ीठ चोर सेंध read more >>
व्यंग~"भारत जोड़ो यात्रा" लेखक~जितेन्द्र शर्मा। तिथी~05/01/2023 मुख्य मार्ग पर घर होने के कुछ विशेष लाभ भले ही हों कभी-कभी हानि भी बहुत ह read more >>
कितने हसीन पल थे जब हम तुम मिले थे वो राते वो बाते वो वो लम्हे वो मुलाकाते।। ना तुम्हे नींद अति थी ना हमे चेन आए एक दूजे की बाहों में सा� read more >>
हमने ताजो तख्त को पलटते देखा है। और पत्थर को खुदा बनते देखा है। जीत मेरी तकदीर की मोहताज नहीं हमने समंदर को बारिश बनते देखा है। बस थ� read more >>
*कब आ गया बुढ़ापा* मुझे अपनी जवानी पर बड़ा ही जोश था । कब ढल गई जवानी पता ही नहीं चला।। कैसे समय निकल गया पता ही नहीं चला । कब आ गया बुढ read more >>
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