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आधुनिक लड़की
मेरे लिए वो हीरे सी अनमोल होती है कंधे पर सर रखकर सारे राज खोल देती है कोशिशें जब भी मै प्यार-ए-इजहार की करता हूँ सारे ख्वाबों से जगाक�
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* दांत निपोरी *
* दांत निपोरी * बड़े प्यार से कर लो भैया थोड़ी सी तुम दांत निपोरी। पत्नी जब गुस्सा हो जाये बड़ी बड़ी आंखें दिखलाए । खाना पानी मिल न प�
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नर पर भारी नारी
*नर पर भारी नारी* अक्ल बाटने लगे विधाता, लंबी लगी कतारी। सभी आदमी खड़े हुए थे, कहीं नहीं थी नारी।। सभी नारियाँ कहाँ रह गई,
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संसद
संसद। अध्यापक ने कक्ष| में घुसते ही पूछा, डू यू नो व्हाट इज पार्लियामेंट। आज सुब
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अतीत के झरोखे से
अतीत के झरोखे से । (चतुर्थ भाग) । दीनू के स्कूल का पहला दिन, खाना खाते हुए श्रीमती जी बताया कि लॉक डाउन अभी और पंद्रह द
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अतीत के झरोखे से
‌ गतांक से आगे--- - (अतीत के झरोखे से तीसरा भाग) गत अंकों में आपने पढ़ा पुराने पत्र लेखन की विधा और मित्रो का आत्मीय स्वभाव।
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अतीत के झरोखे से
‌ गतांक से आगे------------ अतीत के झरोखे से( दूसरा भाग) आपने हमारे इस धारावाहिक लेख के पिछले अंक में पढ़ा। किताबों की अलमारी सुव्�
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अतीत के झरोखे से
अतीत के झरोखे से( पहला भाग) परिषदीय परीक्षा के चलते पिछले दो तीन दिन से घर पर ही थे। खाली थे,सोचा किताबों की अलमारी व्यवस्थित कर दें
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प्रवेशोत्सव
‌प्रवेशोत्सव ‌अप्रेल का महीना आते ही विद्यालयों में प्रवेश की तैयारियां चल रही थी। सभी सरकारी विद्यालयों में प्रवेशोत्सव बड़ी धू�
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पृथ्वीलोक की सैर
पृथ्वीलोक की सैर आजकल मृत्युलोक में ये सुनसानी क्यों है?न गाड़ियों की गड़गड़ाहट, न रेलगाड़ी की आवाज,न बच्चों का शोर और न किसी
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* बड़ा मज़ा आता था *
*बड़ा मज़ा आता था* *कविता* बचपन के दिनों में दोस्तों के साथ मिलकर शरारतों को करने में बड़ा मज़ा आता था। बचपन के खेल खेल मे
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रिटायरमेंट लाइफ
* रिटायरमेंट लाइफ * जब से हम रिटायर्ड हो गये बड़ी मुसीबत में हम पड़ गये दस से पांच की छोड़ नौकरी दिन रात हम काम पे लग गये अब!हम घर पर का�
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