कलम की खामोशी ने
कागज को रद्दी बना दिया।
ये बेरूखी हुस्न की कब तक जवान रखती
इस बच्चे से दिल को......भला
शौक-शौक में हमनें भी अपना सब लुटा � read more >>
हजारों खेल खेले हैं । हमने
इस बालू रेत पर.........!!
वो खेल आज की उलझनों से
अच्छे थे ।
बड़े नहीं उस वक्त हम बच्चे थे ।।
वक्त की उड़ान
और क्या - � read more >>
चाहते हैं ।।
कि यह मोहब्बत दर्द बन के एहसास एक बन जाए......
अब ,सोचते हैं ।।
थोड़ी सी मुश्किलें आपके हिस्से में भी आए......
रंग चढ़े मोहब्बत क� read more >>
जीवन की ये सच्चाईयां ।
हमेशा कुछ ना कुछ कह जाती है।।
अक्सर,हर बात वो अधूरी रहती है ।
क्यों............?
जीवन की इस डोर में अब रिश्तों के
धागे ब� read more >>