खिदमत में पेश है!
जहां के-
इस सफ़र में फ़िरा,
करते हैं मुकाम वाले भी,,
चाह हो दिल में-
अगर गैब-ए-इल्म की,,
खुद-ब-खुद-
राह इनायत होते हैं,,
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आधी अधूरी ज़िंदगी,
थी किसकी ये दारिंदगी?
थी किस्मत या कोई खेल,
हमने पूछा खुदा से, "क्यों ये है ऐसी हालत तेरी ज़मीन की?"
रात-दिन चलता रहा स read more >>
जब आप खुद के साथ व्यक्त बिताते हो तब जो मेहसूस आप को होता है ना वो अद्भुत ही होता है इसीलिए एक बार खुद के साथ 10 मिनट ही सही बिताए तो सही � read more >>