⭐ कविता = इश्तहार
प्यार तो इश्तहार हुआ !
चमड़ी का बाज़ार हुआ !!
लैला-मजनू हीर-राँझा !
जुमलों में शुमार हुआ, !!
ये रिश्ता जो था पावन !
आज क्यों read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ मेरे कल्पित विचार मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ, तुझ read more >>
मत दिखा मुझे ये तेरी शोहरत के पन्ने,
उन्ही पन्नो की किताब हूँ मैं,
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तू सूंघ रही है जिन महुआ के फूलो को,
उन्ही से बनी शराब हूँ मैं,
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और तुझ read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ
मेरे कल्पित विचार
मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ,
तु� read more >>
अक्सर लोगों से सुना हैं जिंदगी चार दिन की होती है पर गलत कहते हैं क्योंकि जब ईश्वर का बुलावा आता है ना, तो जिंदगी कुछ सेकंड की हो जाती है� read more >>