तेरे बिन थिर रहे ना ये मन हे रामा,
वस में रहे ना ये दिल हे मोरे रामा,
तू घट-घट वासी जाने सो ज्ञानी हे रामा...
तू प्रकट जिस घट सोहीं पंडित ह� read more >>
बारिश की बूंदों को देख,
मन कितना आनंदित हो जाता हैं l
और उन बूंदों में मन ,
ये भीगने को चाहता हैं l
रोक नहीं पाती हूँ मैं ख़ुद को ,
जब बार� read more >>
वहा चांद छुपा आईने में
रचनाये -प्रतिभा खडेकार
हे हे हे ला ला ला ला ला,,हे हे हे ला ला ला ला ला...
वहा चांद छुपा आईने में,, देखते मुस्कुरा त read more >>
कहानी - एक सफ़र (यात्रा वृतांत)
एक रोज़ मैं अपनी सहेलियों के साथ किसी काम से बाहर गई थी, उस सफ़र में मुझे एक बुजुर्ग औरत मिली, वह काफी परे� read more >>