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सांस-सांस- फिरे माला जा में चढ़ी सुरति है,, सुमिरन में- "नाम" चले ये ही ध्यान सार है..!! -मोती read more >>
किसी ने कहा- हे वजूद किसका जो हमको ऊभार दे। उसके बाद- थोडे कदम ऊपर ऊठे नही चिल्लाया नीचें उतार द� read more >>
सूरत- ये क्या चीज है, जहां सीरत टिका है,, वहां ध्यान में- "नाम है" सुमिरन ही सार है..!! -मोती read more >>
कुछ क्षणिकाएं- गम्भीर होते हुए भी मेरे सम्बन्धों का टूट जाना याद दिलाता रहा तुम्हारे अनकहे भावों को। २- घर में चोरी हुई सामान की न read more >>
ज्ञान- जहां विवेक वहां, झूठ ना बसता है वहां,, सत्य का- बोलबाला वहां, परमानंद है बसता वहां..!! -मोती read more >>
बात करने से ही प्यार हो ए जरूरी तो नहीं चुप रह कर भी हम प्यार कर सकते है ना सिर्फ सबकुछ देने से ही प्यार हो ए जरूरी तो नहीं कुछ ना देकर भ� read more >>
 हंसूं, रोऊं या चिल्लाऊं यह भाव ही मन से जाता है जब कोई साहब टी.वी. पर आता है। आँखें चमक उठती हैं मन शांति की ओर जाना शुरू होता ही है पर read more >>
" आंच अगर इज्जत पर आई तो तुम्हें वहां आकर ठोक देंगे जिसे तुम अपना इलाका कहते हो ।"🤟 शिवा जी राव मोहिउद्दीन नगर read more >>
जितनी रोशनी मिली उतने तुम नहीं मेरे जितनी चांदनी रही उतने तुम नहीं मेरे। साथ ग़म का रहा दूर न जाने पाए सिसकियां देखने क्यों आए नहीं � read more >>
झूठी उम्मीदों को लेकर आश लगाए बैठे थे। हम उतने काबिल थे ही नहीं जितने की बताये बैठे थे। आधार तुम्हारे मन का था सहज भाव सा जीवन था अनु� read more >>
प्रकृति का नर्तन जब आरंभ होता है! तब घुंघरु का मधुरिम स्वर नहीं काल का तीक्ष्ण नाद सुनाई देता है!! प्रेक्षा त्रिपाठी ✍️ read more >>
मनुष्य बड़ा अभिलाषी है भूल जाता है की आपका ही तो दIसी है पाँचों उंगली का माप सामान नहीं मन हर इंसान बल बुद्धि विदवान नहीं परंतु कर तो सब read more >>
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