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प्यार-महोब्बत
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प्यार-महोब्बत
मेहंदी
हाथों की मेहंदी कुछ कहती है मुझसे कहती है जितना गहरा मेरी मेहंदी का रंग उतना गहरा तेरे साजन के प्यार का रंग। धन्यवाद
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कैसे
दिल में इतना दर्द है छिपाऊं कैसे आंखों में इतना आसूं है बहने से रोकूं कैसे तेरी जुदाई ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा बताऊं कैसे ।
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संजोया था
संजोया था जिस पल को मैंने आज बिखरा - बिखरा नजर आने लगे क्या हुआ अब हम जो तेरे नैनों में चुभने लगे मोहब्बत थी हमसे तो शिकायत भी हमी से कर�
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम्हारे अंदर खुद दिखावे का मोहब्बत भाड़ा पड़ा हुआ है।लेकिन तुम दूसरों से सच्ची मोहब्बत की अपेक्षा कर रहे हो।
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इश्क ए इजहार हम क्या करें
इश्क ए इजहार हम क्या करें रात की वीरांगी में घूमते हैं इधर - उधर दिन के उंजाले में छिपते हैं इधर - उधर क्या बताए क्या हाल हो गया है मेरा म
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समझ न सकें
नादान था ए दिल कुछ समझ न सकें वो वफा न कर सकें हम बेवफा न बन सकें। धन्यवाद
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दिल ही था
दिल का हाल क्या बयां करें ऐ दिल ही था जो धोखा दे दिया इसका क्या इंसाफ करें। धन्यवाद
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हम
हम तेरे इश्क में ऐसे मसरूफ हो गए हमें जमाने की खबर ही नहीं सरे आम बदनाम हो गए हमें अपने आन की परवाह ही नहीं। धन्यवाद
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
लोग गिरी हुई चीज को उठा लेते है।लेकिन एक बार नजर झुक गई तो उठाने में जन्मों लग जाति है।
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Writer by Iqrar Ali,मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब का सब एक दूसरे के खुदा बने हुए है। लेकिन खुद को खुदा कौन बनाएगा।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सिगरेट के तरह जिंदगी हो गई है जो धीरे धीरे कर जिंदगी खत्म हो रही है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कोई किसी का हमदर्द नही है यहां क्योंकि तुम खुद किसी के हमदर्द नही बन पाए तो लोग तुम्हारी हमदर्द क्यों करेंगे।
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