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प्यार-महोब्बत
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प्यार-महोब्बत
Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
निराश मत होना बेटा ये गलत फेमी में मत रहो की मैं ही परेशान हूं ,सब लंका में आग लगी हुई है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
दुखी मत होना बेटा की लोग तुम्हें पसंद नही करते क्योंकि तुम्हारा बाप तुम्हारे जैसे बेटे पर गर्व करता है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम्हारा मोहब्बत वैसा हो हो गया है,जैसे गेट पर खड़ा शाहील विक्षा मांगता है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कलम को लोगों ने बेच दी है, क्योंकि अब इंसाफ कलम से नही पैसों से मिलता है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
रोने के लायक भी नहीं छोड़ा है लोगों ने क्योंकि उसे हम से ज्यादा हमारे चाहतों से मोहब्बत हो गईं है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब सब ने मुंह मोड़ ही लिया है तो अपना भी हक बनता क्यूंकि सबने जरूरत पर ही मुंह मोड़ा है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मोहब्बत वायर के अंदर उस करेंट के जैसा है,जो दिखाई तो नही देता लेकिन अगर झटका मार दे तो जिंदगी झंड कर देती है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम बदल गई हो या फिर तुम्हारी मोहब्बत खत्म हो गई।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आज मेरी गवाही देने वाला कोई नही,लेकिन जब वक्त अपना होगा तो वकील भी मैं रहूंगा और गवाह भी।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आज हर एक बंदा होसियार हो गया है,लेकिन जब जरूरत हो तो लोग गूंगा बन जाते है।
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Writer by iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अभी भी वक्त है आजा मेरे दरबार मैं तुझे मैं माफ कर दूंगा क्योंकि मैं खोदा हूं इंसान नही।
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शायरी - दर्द भरी।
धिरे धिरे जब से तु मेरी होती जा रही हो। धिरे धिरे तू मेरी करीब आ रही हो। मैं खुद का ही नही रह पा रहा हूँ। मैं खुद को ही अपना नहीं कह पा रह
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