शृंगार छंद "तड़प"
सजन मत प्यास अधूरी छोड़।
नहीं कोमल मन मेरा तोड़।।
बहुत ही तड़पी करके याद।
सुनो अब तो तुम अंतर्नाद।।
सदा तारे गिन का read more >>
तू जो रूठा ,तुझे मनाऊ तो मनाऊ कैसे
खुदको तेरी नजरों मे, उठाऊ तो उठाऊ कैसे
गलती करने की आदत सी हो गई है ,.............. जी
तुझे हर बारी, मनाने का फण्� read more >>