बस लब्ज है!!
दुख इतना है कि शायर बन गया,
दर्द इतना है कि घायल बन गया,
गुम हूं कहीं,
ठोकर खा, भटकता सा पागल बन गया,
कहां मैं उसके लायक बनने च� read more >>
तेरे नाम से इस कदर रोया आज ---2
तुम रुह हो मेरी --
मैं जिस्म हूँ तेरी ,
तुम बिन कैसे जीऊँगा ,
लौट के आ जाओ ---2
तुम बिन अधूरा हर साज़ ,
करो दास्ताँ � read more >>
किसे सुनाऊँ दास्ताँ ग़म की ---2
आज भी रुला जाती है ,
रवानी शाम की ---
कहकशाँ सी धुंधली सूरत ---2
जहाँ में तुम आफ़ताब ईद का ,
बेताब है दिन , बेचैन रा� read more >>
गम को भूलाने की बहाने बहुत की ---2
आलम में मुस्कुराना है ,
दामन में काटें को खिला के ---2
होठों में गुलशन को खिलाया हूँ ,
बहाने की बहुत तुझे भ� read more >>
आप की ख़त को ,आज पढ़ रहा हूँ।
इतना लिखी हो ख़त ,,की सुबह-शाम पढ़ रहा हूँ।।
इक़्श में बीते सुख-दुःख आज ख़त में पढ़ रहा हूँ।
जो बीत था पल इक़्श का ,व� read more >>