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ग़रीबी और अमीरी का खेल
सात साल का एक छोटा लड़का था।वह गरीब परिवार से था।घर में उसके माता-पिता उसकी एक बहन थी।जब वह अपने पापा के साथ बाहार जाता था।लोग उसके पित�
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कहूं क्या कहानियां-जीने के लिए बनी हैं
कहूं क्या कहानियां, जीने के लिए बनी हैं। ना जाने कितनी पहेलियां, हैं एक उलझन जीवन सुलझ के भी ना सुलझ पाये।एक थी मासूम सी लड़की था खुशहाल
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डीपफेेक- विज्ञान का अभिशाप
स्कूल, कॉलेज में जब निबंध लिखने दिया जाता था, तब निबंध का एक विषय अक्सर रहा करता था कि ‘विज्ञानः वरदान या अभिशॉप’। तब जितने वरदान लिखे
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कल्पना-लड़िकयों की बहुत कल्पना होती हैं
कल्पना एक ऐसी सोच का नाम है जो हुआ नहीं हैं आगे होगा या नहीं पता नहीं हैं।एक सपने की तरह सच होगा या नहीं।ऐसे ही सादी होने से पहले लड़िकय�
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हार का ठिकरा ईवीएम पर
जैसा कि अनुमान था, पांच राज्यों में-से चार राज्यों में करारी हार का ठिकरा कांग्रेस ने ईवीएम पर फोड़कर अपनी कमियों व खामियों को छुपाने क�
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दर्द-दर्द बहुत है दिल में
दर्द बहुत है दिल में पर हम बताए भी तो किसे यहां तो जिसको देखो हर किसी दर्द में डूबा दिखाई देता है धन्यवाद✍️
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तेरी बाहों में- हम अपना शुकून ढूंढ रहे थें
तेरी बाहों में हम अपना शुकून ढूंढ रहे थें हमें क्या खबर थी कि तुम अपनी बाहें किसी और के लिए फैला रखे थें धन्यवाद
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हक-हर चीज पे हक दिया था
हर चीज पे हक दिया था उसने मुझे,पर जो चीज मुझे प्यारी थी उसी को उसने किसी और को दे दिया धन्यवाद
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भगवान रहम कर-क्यों इतना दर्द दे रहा है
क्यों इतना दर्द दे रहा है क्यों जिंदगी छीन रहा है। जब तेरे मन पर ही सब होना तो क्यों हमें जिंदगी दे रहा है भगवान कर रहेम थोड़ा ना जिं
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पैसे की मोहब्बत- बेमाईंने बन गई
हैरत-फरोश हूँ में इस दौर-ए-जहालत में जहाँ बिन पैसे की मोहब्बत बेमाईंने बन गई, और बिन पैसे की हमदर्दि कबाड़ बन गई। हैरत-फरोश हूँ में इस द�
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जज्बात क्या समझेगा वो मेरा-जब वो खुद मुझे ठुकरा कर चल गया
जज्बात क्या समझेगा वो मेरा जब वो खुद मुझे ठुकरा कर चल गया अब तो शिकायत ना होती मुझे क्योंकि जिंदगी का सबक सिखाकर वो मुझे चला गया
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भीड़ में भी तन्हाई का अहसास होता है
भीड़ में भी तन्हाई का अहसास होता है अपनों के बीच भी परायों सा महसूस होता है और क्यों ना हो जब अपने ही मुंह फेर कर बैठा हो अजनबी शहर में
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