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रोhit Singh

रोhit Singh

रोhit Singh

@ rohit-singh
, Delhi

" जिंदगी वो ख़्वाब है जिसका आंख खुलते ही हक़ीक़त से सामना हो जाता है "

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My Articles

ये कसमें ये वादें ना दिया कर सारे टूट जाते हैं....! जरा सी गलतफहमियों में ही अपने रूठ जाते हैं....! यूं तो भागते दौड़ते गुज़र रहा है वक्त अपन read more >>
कुछ पल साथ रही फिर साथ छोड़ कर चली गई.... बहते आंखों में वह बस ख़्वाब छोड़ कर चली गई...!! मैं ठहरा रहा उस मोड़ पर उसे देखते हुए बेबस और वह बि� read more >>
कोई ना हैं हमनवां मेरा......... जिस से बातें में किया करूं..!! इश्क़ हैं ही कहां मुझे में यारों जो मैं इश्क़ जिया करूं ......!! ये सांसे तो बस एक � read more >>
गलत हूं मैं या सही हूं....मैं तुम मुझे बता दिया......करो..!! दोहराया ना जा सके गलतियां इसलिए हो सके तो सज़ा दिया..करो..! क्या हैं चेहरा मेर� read more >>
मैं वही हूं जो था कभी था कभी मैं वही रहूंगा हालात बदले या वक्त सच कहता था सच कहूंगा..! बेख़ौफ़ था आसमान में आसमान से जुड़ा रहूंगा पर � read more >>
तेरे साथ बैठ कुछ पल बिताना...अच्छा लगा मेरे नज़रों से तेरा नज़रें चुराना.....अच्छा लगा..!! दो चिपके पत्तों के जैसे तेरे ये होंठ...सच कहूँ ब� read more >>
'किस्मत रूठी हैं'...'और वक्त का थोड़ा मारा..हूं' मैं अभी भी 'कोशिश' में हूं...'अभी नहीं हारा..हूं'..!! read more >>
पड़ने दे छाले पैरों तले पसीने माथे पर आने..दे मंज़िल कि आज ज़िद रख या मंजिल का हो जाने..दे..! खुली आंखों के ख़्वाब हैं जो आज इन्हें न� read more >>
अपने आप में ही खो जाना मेरा कभी हंसना तो कभी रो जाना मेरा कोरा कागज़ सा सादा सादा कभी रंग बिरंगी किताब हो जाना मेरा किस तरफ है सफ़र क� read more >>
'बैल'..'बुद्धि' है..हम जरा से... पर.. 'सांप'..नहीं है और इतनी आसानी से समझ आ जाएं 'हम-हम'...हैं...आप नहीं हैं..!! read more >>
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