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शरद भूषण मोंगरा
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शरद भूषण मोंगरा
शरद भूषण मोंगरा
शरद भूषण मोंगरा
@ sharatha-bhashhanae-magara
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निरलेप
"सत्यसार नहीं प्रतिबंधित, भीतर जाकर खोज करो।" "कहां किसकी माने बैठे हो, खुद सोचो ज़रा होश करो।" "जग का मालिक बैठ देह में हो गया बंद अलेप" "�
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ईश्वर
तब तक ये चलता रहे, जब तक इसमें मैं जो मै इस से जुदा हुई, ये कुछ भी ना है
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हे भाषा तुम वो हिंदी हो
" हे भाषा ", हे भाषा तुम वो हिंदी हो ......... हिंद देश की भाषा बनकर,गूँज रही जो युगों युगों से जिसमे सुगंध है संस्क्रती की,प्रेम मा
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कुल मालिक
कुल मालिक ही बाप है, रहे घड़ी अंग संग। जिस दिन वो ना संग हो, सजे ना कोई रंग।। शरद भूषण मोंगरा
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अनहद नाद
अनहद नाद धुर धाम तें, बरस रहा निशदिन। किन्तु मनुष भ्रमित हुआ, तरस रहा निशदिन।। शरद भूषण मोंगरा
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टूटे फ़ूटे शब्द
मैं कोई बड़ा साहित्यकार नहीं, जो हीरे-जवाहरात के बदले चमकते हुए शब्द खरीद लाऊंगा। मैं तो कमज़ोरों लाचारों की पीड़ा महसूस करने वाला छ�
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मन को वश में रख
जहां तहां हथ जोड़ता, मनुष्य है अज्ञानी। स्वयं छोड़ मैं में पड़ा, बन रहा अभिमानी।। मंदिर ऐसे सज रहा, ज्यों व्यापार दुकान। पंडित जेबें
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ईश्वरीय दोहे
जहां तहां हथ जोड़ता, मनुष्य है अज्ञानी। स्वयं छोड़ मैं में पड़ा, बन रहा अभिमानी।। मंदिर ऐसे सज रहा, ज्यों व्यापार दुकान। पंडित जेबें
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माया हिरनी
"माया हिरनी बन खड़ी, नारी तेरे द्वार। एक तरफ मुक्ती खुली, एक तरफ नरक द्वार"।। - शरद भूषण मोंगरा
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'सतगुरु की महिमा अनंत'
"सतगुरु की महिमा अनंत, शब्द गुरु सतनाम परमधाम से जोड़े जो, ऐसा है गुरु ज्ञान"।। शरद भूषण मोंगरा
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