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"रूह"मैं क्षणिक क्षण भुंगर नहीं मैं यथार्थ सत्य हूं किन्तु तुमको दीख ता जो मैं वही असत्य हूं' हूं चराचर में रमा क्या कोई मुझको जानता ह� read more >>
छप्पर वाले.... छप्पर वाले यार पुराने आंगन में औस टपकती रात सिराहने आंगन में चादर में ढकता हूं तन जैसे तैसे कैसे सोऊं रात बिताने आंगन मे read more >>
"क्यों तरसता तरसता है आदमी", इस बड़े शहर की क्या कहूं दास्तान ना पेट में खाना है ना है सर पे मकान तन पे कपड़े नहीं सामने है दुकान कैसे ज� read more >>
"पंजाबी गीत" आई यार बैसाखी..... आई यार बैसाखी आई यार बैसाखी अखियां है नूर दी प्यासी आई यार बैसाखी आई यार बैसाखी........ 1- पिंड पिंड मेले read more >>
"फिल्म वेलकम टू उत्तराखंड" फिल्म"वेलकम टू उत्तराखंड", को इतना प्यार,सहयोग देने व सराहना करने हेतु सभी दर्शकों का तहे दिल से शुक्रिया। द read more >>
"मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता" मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता यूं ही जिस ओर देखता हूं, दर्द में डूबे लोगों की "आह" जब भीतर उतरती है निकाल लाती है व read more >>
तुम रूप का भंडार लिए सोनभद्र नदी बनी मैं छोटा सा आकार लिए एक बूंद जल बना। तुम भिन्न-भिन्न श्रंगार किए एक गंगधार बनी मैं सिर्फ ठूंठ पत्� read more >>
मुसलसल जिंदगी बहती चली नदी के वेग सी कोई परिंदा दरख़्त पर बैठा हुआ मुझको देखता है मैं किसी कीड़े की भांति पत्ते पर बैठा किनारा खोजता read more >>
"रूहानियत के लिए", वो नूर (ईश्वर) मेरे भीतर है, मैं (अहं) मानती नहीं है रूह रोज़ अपने रब के सजदे से चूकती है। इश्क खुदा की जात है इश्क कि ड� read more >>
खाक पर ही बात होगी जिस्म का गुरुर न कर नाम जप मालिक से मिल खुद से खुद को दूर न कर। डूबने में भेद है पर ढूंढने में देर ना कर, रब तेरे भी� read more >>
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