मोती लाल साहु 03 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मैं स्वयं का मित्र बनूं, यूंकि- इस संसार में एक भी नहीं- जिसके जीवन का भरोसा हो। 30547 0 Hindi :: हिंदी
मैं स्वयं का मित्र बनूं...! यूंकि- इस संसार में एक भी नहीं, जिसके जीवन का भरोसा हो...!! -मोती
Login to post a comment!
...