तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का,
गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है?
तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल,
नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है?
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तेरी दर्द भरी आहे,
कानों से कैसे जारी करें।
तेरी दर्द भरी आहे,
कानों से कैसे जारी करें।
जो तेरी रूह को.. छू कर,
आई हवा मेरे पथ से वो,
अपन� read more >>
मतला:
कभी-कभी ख़ामोशी भी बयान बन जाती है,
हर अनकही सी बात पहचान बन जाती है।
लबों पे जो न आए, वो नज़र कह जाती है,
चुप्पी भी दर्द की ज़ुबान � read more >>
करम हर क़दम पर, है तेरी ये नज़र,
ऐ मुसाफ़िर ज़रा, अब तू संभल कर।
काट कर ये कोटी जन्म दिए,
मानव तन दिया है, तू संभल कर।
संभल के चल तू , ये मा� read more >>