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ग़ज़ल
कुछ इस तरह से अबकी सताया गया मुझे
कुछ इस तरह से अबकी सताया गया मुझे हँसने लगा तो फिर से रुलाया गया मुझे। हर शख्स जिंदा देखके हैरान था यहां कल फिर से खलबतों में बुलाया ग�
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इन मयकदों काअबकी सारा हिसाब कर दे
इन मयकदों काअबकी सारा हिसाब कर दे मेरे लहू की बूंदों को ही शराब कर दे। जालिम न चल कमर को अपनी दिखादिखा के ऐसा न हो ये मेरी नीयत खराब कर �
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कोई तो याद मेरी कहानी रखे
कोई तो याद मेरी कहानी रखे बेवजह अपनी आंखों मे पानी रखे। रब्त है जब उसे हर नई चीज से सांस क्यों फिर बदन में पुरानी रखे। क्यों न हो हादस
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आज फिर किसी से कोई बवाल कर बैठे
आज फिर किसी से कोई बवाल कर बैठे सर ए राह मोहब्बत का सवाल कर बैठे। कांच का बदन उसका कांच की कमर उसकी और कांच की तशरीफ है सँभाल कर बैठे। �
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जिन हसीनो के यां नखरे उठाए जाते हैं
जिन हसीनो के यां नखरे उठाए जाते हैं उनकी आंख से खंजर भी चलाए जाते हैं। वागवान ए गुल के मुंह से सुना हमने हर निगाह में उनकी फूल पाए जात�
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कोई फकीर फुकरा बताया गया मुझे
कोई फकीर फुकरा बताया गया मुझे मेरे ही घर मे पूछ के लाया गया मुझे। पहले कहा सभी ने जरा हंस दीजिए जो हंसने लगा तो रुलाया गया मुझे। हां इ
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बिछड़ने वालों से फिर गीला क्या
कहो तो करले अब सुलाह क्या खत्म कर दे ये सिलसिला क्या ।। बिछड़ने वाले है आओ गले मिले बिछड़ने वाले से फिर गीला क्या ।। सच ही तो है इश्क �
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ख़ुदा खामोश बैठा है
ख़ुदा खामोश बैठा है अकेला बन्द कमरे में बड़ा गुमसुम सा रहता है अकेला बन्द कमरे में आके दुनिया में शायद बहुत करीब से देखे इन्सां बनाए
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हम सच वफ़ा ईमान से
हम सच वफ़ा ईमान से आगे न बढ़ सके गुरबत के इस मकान से आगे न बढ़ सके सरमायादार बन गए वो ईमान बेचकर हम छोटी सी इस दुकान से आगे न बढ़ सके दु�
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Khabo k parindi
Kabo k parindi pinjri s ak din azaad hogi Ummido k din fir abad hogi Kismto m kya like y soch kr n ghbra to Kar mhant y soch kr agi bhdi ja to
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उसकी खुशी के लिए उसी को छोड़ दिया
गमों को अपना लिया खुशी को छोड़ दिया उसकी खुशी के लिए उसी को छोड़ दिया ।। मेरे पास होकर वो नाखुश रहे बर्दाश्त नही वो खुश नही था मुझसे त�
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ये कोन सी कमी है जो खाए जा रही हे
नींद से मुझको जगाए जा रही है आवाज किसी की बुलाए जा रही है ।। काफी अकेला हु लश्करो में होकर भी में ये कोन सी कमी है जो खाए जा रही है ।। स�
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