बहर:_2121,1212,22
काफिया:_आए
रदीफ:_हैं
गज़ल
आज शाम नरम हवाए हैं,
बेरुखी म अदा जगाए हैं।
लोग आज मनों रगों में रख,
प्यार सिर्फ़ मधु आजमाए हैं।
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मैं आज अपने छत से चांद को देखा !
आपसे मिलने की गुजारिश कर बैठी !
ए ?खुदा! न जाने मैं किस की
सिफारिश कर बैठी !
कुछ इस तरह से दिन गुजर रहे ह read more >>