मेरे मन की तू आवत्री, मेरे घर की तू सावत्री
कभी निंदो में आती है, कभी बातो में बहाती है|
नजर अंदाज कर सोचे तो तेरी याद आती है
कभी तू तन को � read more >>
संमुदर पायाब हो गये और नदियाँ उफान पर है
पर अभी तक उसका नाम मेरी जबान पर है
उसने अपने तरकस के सारे तीर छोड़ दिये मुझ पर
पर मेरे तीर � read more >>