(दोहा छंद)
यूं ही हृदय उदास है, दिल में है जो दर्द।
किसे कहूं अब यार मैं, मौसम भी है सर्द।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्� read more >>
(मुक्तक छंद)
हमें मुहब्बत हो गया, तुझ से ही ओ यार।
यादों में तुम ही रहें, मेरे दिल हकदार।
तुझ में ही है जिन्दगी, तुझ में ही दिल जान_
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(दोहा छंद)
रुग्ण लोग से दूर रह, मन में भर उत्साह।
सदा गात पर ध्यान रख, आते कभी न आह।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(� read more >>