(Verse 1 – Soft)
चल पड़े हैं रास्ते फिर से पुकारते,
टूटे सपने भी आज साथ चल पड़े।
धूप है तो क्या हुआ, छाँव बन के तू बढ़,
हार के भी जीता है, जो खुद से क read more >>
पीड़ा में जीवन, थक सा गया हूँ,
क्या दोगे आके तुम सहारा?
निश्छल प्रेम की कोमल ममता, हृदय में बहती है,
उथला मन, तुम्हारे ही किस्से कहता है।
म read more >>
(Verse 1)
क्यों रुका है, क्यों डरा है, ज़रा खुद को पहचान ले
रास्तों पे धूल है गर, कदमों में तू जान ले
तेरी मंज़िल आसमाँ है, ज़मीं से ना बंधा रह
� read more >>
काया माटी की, ये तो सब जाने,
पर भीतर छुपा कोई और खजाना।
ना कोई रंग, ना कोई आकृति,
वो शुद्ध चेतना है, अमर ज्योति।
हर जीव में समाया वो परम स read more >>
सलाम-ए-कायनात-ए-कमाल को
तू है कामिल रचा-ए-हयात को
ये अर्ज़-ए-नियाज़-ए-मुहब्बत भी क्या है
बढ़ा दे तू अब मेहर-ओ-सौग़ात को
सलाम-ए-कायनात-ए-� read more >>
सपनों से किया प्यार..
रचना -प्रतिभा खडेकार
,,,7517947668
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,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार
,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुक� read more >>