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मेरा सफ़र अलग है, मुझे जाने दीजिए।

Kishor Kumar Bhardwaj 29 Oct 2025 गीत अन्य सफ़र 34213 0 Hindi :: हिंदी

मुझको न रोकिए, न सलाहें दीजिए,
मेरा सफ़र अलग है, मुझे जाने दीजिए।
हार भी मिले अगर, तो मुस्कराने दीजिए,
क़िस्मत को हमें अपनी आज़माने दीजिए।

हर मोड़ पे हैं मुश्किलें, पर मन में है उजाला,
जो साथ था साया कभी, अब वही है रखवाला।
राहें अनजानी सही, पर हौसले पुराने हैं,
ज़ख़्मों की ज़ुबां पर भी अब गीत सुहाने हैं।

ठोकरें मिलीं तो क्या, सफ़र गढ़ते गए,
गिरकर भी उठे, और फिर बढ़ते गए।

कदम थके नहीं हैं, बस इरादे सधे हुए,
हर ठोकरों ने हमें और गढ़े हुए।
मंज़िल कहाँ है, ये तो वक्त ही बताएगा,
पर चलना ज़रूरी है - यही दिल समझाएगा।

हर आँधी से हम, कुछ और सँवरे हैं,
टूटे नहीं हैं, बस और निखरे हैं।

तो मुझको न रोकिए, न ये नज़ारे दीजिए,
मेरा सफ़र अलग है, मुझे जाने दीजिए।
ज़्यादा से ज़्यादा होगा ये कि हार जाएंगे,
क़िस्मत को हमें अपनी आज़माने दीजिए।
✍️ के_भारद्वाज.

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