मेरी एक दोस्त हैं जो इन दिनों ससुराल में है ,जो फूलों को छोटेपन से ही सींच -सींच कर बड़ा करती हैं ,और जब उनके खिलने की बारी आती है, तब तक उनक� read more >>
मेरी एक दोस्त हैं जो इन दिनों ससुराल में है ,जो फूलों को छोटेपन से ही सींच -सींच कर बड़ा करती हैं ,और जब उनके खिलने की बारी आती है, तब तक उनक� read more >>
अपनी दुनियाँ मे, कोई ,कैसे ?
गुम ,हो गया ।
खुला था ! आसमाँ , देखते-दखते .वो सितारों को सो गया।
अपनी दुनियाँ...........
जाने कैसे ? बदला वक्त ज़िन� read more >>
घुट- घुट के जी रहा हूँ,
घूँट- घूँट पी रहा हूँ।
ये सितम का कहर,
तेरे इश्क का जहर।
लुट- लुट के जी रहा हूँ,
घूँट - घूँट पी रहा हूँ।।
टुकड़े- � read more >>