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कविताएँ
समाजिक कुरीतिया-अज्ञानता की अँधेरी रात है
अज्ञानता की अँधेरी रात है, समाज की कुरीतियों का अन्धकार। दुष्कर्मों का घना पार्दा है, मनुष्यता की आदतों का विकार। कुछ लोगों में दहश�
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जम्मू कश्मीर जल रहा है-आतंकवाद से
दिल्ली दहल रहा है, बिहार बदल रहा है, कि आतंकवाद से, जम्मू- कश्मीर जल रहा है। यहाँ रोज होने लगे है धमाके, दिन में भी पड़ने लगे है डाँके�
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गहरी नींद-कैसे आती सारे दुख दर्द छोड़ कर
नींद कैसे आती, सारे दुख दर्द छोड़ कर आराम करने के लिए उकसाती, उसको नींद से जगाए, जो अपना उन्नत भविष्य छोड़ कर, अपराध की राह अपनाएं, उसको न�
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लोगों से इतना दूर हूँ-तुम्हारी प्रेरणाओं से
मैं तुम लोगों से इतना दूर हूँ तुम्हारी प्रेरणाओं से मेरी प्रेरणा इतनी भिन्न है कि जो तुम्हारे लिए विष है, मेरे लिए अन्न है। मेरी असंग
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प्रेम सशक्ति-प्रेम प्रयुक्ति युगल अनुराग
प्रेम सशक्ति प्रेम विरक्ति, प्रेम सशक्ति प्रेम समयुक्ति, मन युगल कही, प्रेम प्रयुक्ति युगल अनुराग, तो प्रेम संयुक्ति आत्म शुद्धि क�
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जब मुझे मेरे पापा का सहारा मिल गया
वक्त की अनमोल कहानी सुनाऊंगी अपनी जुबानी मैं लड़ रही थी वक्त से यह सोचकर की इक दिन वक्त को बदल देंगे और कुछ लोग इसी वक्त हमसे लड़ने लगे
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चलना पग पग पर-बहुत कठिन हो
आदर्श बड़े झूठे लगते हैं, केवल बातों तक सीमित सच्चाई में मुख मोड़ें रहते हैं बस निष्ठुर बनकर। बात करो आदर्शों की तो, स्वयं चलो उस पर।
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चुभी कीलें इतने-पुरानी बातों की
जगमगाती रोशनी थी पुरानी बातों की। सतह से उठती थी हंसी, खनखनाती बातों की। गमी ने इस तरह पैर फैलाया ऐसा लगता है बरसों से कोई था ही नहीं�
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दुखों से यूं उबरते है जाना कहां
तमन्ना बता दें रास्ते, जाना कहां, मंजिलें दूर है,बताना कहां। भूल कर दी, जो अपनी बात कह दी, दुखों से यूं उबरते है, था जाना कहां। सुधा चौध�
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मशीनों के आविष्कार ने बदल दी दुनिया
आगे बढ़ती विज्ञान की नई बारिश है, कंप्यूटरों का नया युग सारे जहां में है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महकता गुलदस्ता, होने लगा है खतर�
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प्यार की आग- जल रही है हृदय में
प्यार की आग जल रही है हृदय में, इसी आग को मैं बांटा करता हूं। मेरा भी इरादा है फूंकने का, लेकिन लोग जलेंगे नहीं खिलेंगे। चाहता हूं नफर
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निडर नारी-न्याय खुद को दिलाएंगे
बहुत हुआ अन्याय अब, न्याय खुद को दिलाएंगे। बहुत बन गए हम नारी बेचारी, अब दुर्गा बनकर दिखाएंगे। बहुत जी चुके हम डर- डर कर, अब निडर बन क�
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