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तुम इतिहास रचा सकते हो
चिंता मत करो तुम आज दुःख है तो कल सुख भी होगा अँधेरा के बाद उजाला आता ही है इस दुनिआ में सब कुछ टेम्पररी है इससे मत घभराओ तुम अच्छ�
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कुछ उदेश्य होना चाहिए-ज़िंदगी में
कुछ उदेश्य होना चाहिए ज़िंदगी में बर्बाद नहीं होने देना चाहिए उदेश्य के बिना युही समय को ज़िंदगी व्यर्थ है कुछ तो उदेश्य होना चाह�
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उदास मत हो तुम-ज़िंदगी खुल के जिओ तुम
उदास मत हो तुम इस दुनिया में सब कुछ टेम्पररी है सुख हो या दुःख हो ज़िंदगी खुल के जिओ तुम तनाव लेना छोड़ दो तुम मुस्कराओ तुम अच्छे द�
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समय मूल्यवान है
समय मूल्यवान है समय को जाने मत दो तुम . तुम्हारी ज़िंदगी बन भी सकती है और बिगड़ भी सकती है समय को सही चीजों में लगाओ तुम आगे बढ़ो तुम म�
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सोंच कर देखो (पक्षी पर कविता)
सोंच कर देखो ( पक्षी पर कविता) किसी आशियाना को कोई कब तक बनाएगा, जब उखाड़ फेंकने पर कोई तुला हो, बाग बगीचा वन उपवन को छिन्न-भिन्न कर हम
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जीव अपने अंतर्मन को जानकर
जीव अपने- अंतर्मन को जान कर,, अपने नाशवान रूप- से छुटकारा पा लेता है,, और वह पूर्णता- की ओर बढ़ने लगता है....!!!! -मोती
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परमानंद आपका आंतरिक अस्तित्व में हमेशा मौजूद है
बाह्य परिस्थिति- चाहे जितना विपरीत हो,, परमानंद- आपका आंतरिक, अस्तित्व में हमेशा मौजूद है...!!!! -मोती
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वक़्त की समझ नहीं जिसको वो वक़्त पर ठोकर खाता हैं
वक़्त की समझ नहीं जिसको , वो वक़्त पर ठोकर खाता है। आलस निंद्रा में मदहोश होकर, अपना समय गवाता है। होश तब आता जब वक़्त नहीं, फ़िर कि�
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यदि होता नभ का पंछी मैं
यदि होता नभ का पंछी मैं यदि होता नभ का पंछी मैं दूर गगन उड़ जाता, नन्हें नन्हें उड़-पंखों से गगन घूम कर आता। फुदक फुदक कर खुशियों मन �
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सैलानियों के इस शहर में भृंगी ढूंढता फिरता हूं
सैलानियों- के इस शहर में, भृंगी ढूंढता फिरता हूं ऐ फ़ितरत तू- अपनी रजा तो बता यूंकि- फ़ितरत बदलता है सफार-ए- मंज़िल में यह फ़ितरत ह
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जीवन की इस झंझा में
सब कुछ सह लेने के बाद, बहुत कुछ कहना आया। जीवन की इस झंझा में नये रुप में बहना आया। ये अधूरी सी कथा कुछ खास है। बीच बनते धार में, इस बात
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बेड़ियां तोड़ो-उदासी छोड़ो
बेड़ियाँ तोड़ो, उदासी छोड़ो। जीवन के रंगों को अपनाओ, मन की खिलखिलाहट फिर से बहलाओ। दिल की धड़कनों को उछालो, खुद को नये सपनों से भरपूर �
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