यूं तो कई बार आए - गए तेरे शहर से ,
पर पैरों में कभी जंजीर सी ना लगी ...!
आज यूं लगा बढ़ते कदम ,
कई बार रुक से गए ...!
शहर वही , गलियां वही ,
घर वह� read more >>
बिसरी इस , बिखरे विश्वास ...!
बिन बोले , ना कोई जड़ ....
ना कोई शाख ...!
बिन किस्मत , ना ज्यादा ना कम होय ....!
बिन बादल , ना बरसात होय ...!
पीहर ना शोभ� read more >>
दिल को दरिया बनाए ...!
आंखें बिछाए बैठी हूं ...!
वो लौटकर हमें ,
आवाज लगाएंगे ....!
ये आस लगाए बैठी हूं ...!
ना तुम आते हो ...!
ना कोई खबर ही तेरी ...!
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आज मैं तन्हाई में ही खुश हूं....!
जिसे पा ना सकी ...
उसकी जुदाई में भी खुश हूं ...!
हाथों की लकीरों में नहीं था ....!
इस दर्द -ए- एहसास से ही मैं खुश read more >>