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कविताएँ
स्पर्धा का दौर है
स्पर्धा का दौर है,मन को रखें बुलंद। रखिए ऊँच विचार को, हों शीतल सम चंद।। स्पर्धा का दौर है, रखें साथ उत्साह। कम हों कभी न चाह नव,लगे सु�
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छाया सबको चाहिए
छाया सबको चाहिए, क्योंकि सभी में कष्ट। ऐसे में छाया मिले, होता विकार नष्ट।। छाया सबको चाहिए,तन्हा सब हैं आज। साथी बनकर साथ चल,सुन्दर �
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खुशियां मय संसार था
चले स्कूल शिशु सभी,पानी मय है राह। बैग स्कूल का लिए,चंचल सबका चाह।। सब कागज के नाव को,लिए हुए हैं हाथ। तैराने में हैं लगे, सभी दोस्ते�
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चले स्कूल शिशु सभी
चले स्कूल शिशु सभी,पानी मय है राह। बैग स्कूल का लिए,चंचल सबका चाह।। सब कागज के नाव को,लिए हुए हैं हाथ। तैराने में हैं लगे, सभी दोस्ते�
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साथी बन अनुराग का
माया के भ्रम जाल का,ढूंढें सभी निदान। जाते पर सब ही उलझ,छूटे नहीं गुमान।। माया के भ्रम जाल से, बचें सदा इन्सान। साथी बन अनुराग का,उनका
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मेंढक हैं बरसात के
मेंढक हैं बरसात के, इनकी अभी बहार। करते मिलकर ये मजे, कुछ दिन में बेजार।। मेंढक हैं बरसात के, समझ रहें हैं शेर। सवा शेर से जब मिले, हो ज�
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मेंढक हैं बरसात के
मेंढक हैं बरसात के, इनकी अभी बहार। करते मिलकर ये मजे, कुछ दिन में बेजार।। मेंढक हैं बरसात के, समझ रहें हैं शेर। सवा शेर से जब मिले, हो ज�
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माया के भ्रम जाल
माया के भ्रम जाल का,ढूंढें सभी निदान। जाते पर सब ही उलझ,छूटे नहीं गुमान।। माया के भ्रम जाल से, बचें सदा इन्सान। साथी बन अनुराग का,उनका
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दुनियाँ का दस्तुर है
दुनियाँ का दस्तूर है, जीवन है संघर्ष। पाते मीठा स्वाद को, सत्य अटल निष्कर्ष।। दुनियाँ का दस्तूर है,चलूं सदा सच राह। पुष्ट विजय तब है �
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समाधान हर बात का
समाधान हर बात का,होता नहीं निराश। सुख दुख तो आते रहे, मन में दिव्य प्रकाश।। समाधान हर बात का,बनूं नहीं मैं दुष्ट। रखूं सदा मैं मित्रत�
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तुम्हें अपने खातिर....
विलक्षण- जीव जगत में तु श्रेष्ठ, एक कुव्वत के खातिर रूबरू- हो जा इस जीवन से क्योंकि- रब ने चुना है, तुम्हें अपने खातिर -मोती
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शाश्वत वचन....
शाश्वत वचन! अपने अंतरतम की- आवाज को जब मनुष्य, सुनने के काबिल बनता है तब जीवन का- असली नृत्य शुरू होता है शाश्वत वचन! -मोती
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