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*कहां खो गई प्यारी मां* कहां खो गई प्यारी मां नज़र नहीं क्यों आती मां छवि आंखों में है तेरी मां क्यो?नहीं दिख पाती मां।। सुबह हो गई उठ read more >>
निकला था चांद आसमां में लिए संग असंख्य सितारे प्रफुल्लित हुआ एक शिशु देखकर ऐसे नजारे मानो दूध की भरी कटोरी उसी नजर आने लगी पानी के लि� read more >>
कविता- मुझे अंधियारों में कहीं खोने दो। दिनांक- 15/05/2023 दीपक बुझा दो कि रात होने दो, मुझे अंधियारों में कहीं खोने दो। टूट गया हूं अपनो की read more >>
वक्त की बेरहमी मान भी ले जाती है सम्मान भी वक्त की बेरहमी ना सोने देती है ना जागने वक्त की बेरहमी हवाओं में घुटन बनकर समा जाती है। वक्त � read more >>
कविता -जिंदगी की किताब एक दिन पढ़ने लगा जिंदगी की किताब, पलटने लगा पल पल के पन्नों को और समझने लगा बीती दास्तां। खोता गया अतीत के � read more >>
माँ माँ तो आखिर माँ होती है , माँ जेसी कोई कहाँ होती है माँ तो आखिर माँ होती है | जब भी अँधेरा छा जाता है , वह दीपक बन जाती है , इक अकेली र read more >>
रोजगार अहंकार ‌जब मन में हो विश्वास, तब सब देंगे तुम्हारा साथ। मैं बेरोजगार हूं तो क्या हुआ, लेकिन हूं अपने माता-पिता का खास। और मुझ� read more >>
पहली दफा बो जो मुझे मिला। इस दिल में कुछ घबराहट हुई। फिर नजर जो उस से मिली तो मानो चाँदनी रात हुई। ये शिलशिला ऐशे ही जारी रहा में उसे द� read more >>
घर जिसे समझे थे वो मकान निकला अपने ही दर्द से सब बहा निकला। रिश्ते समझते समझते जिंदगी निकली अब तो कुछ समझने के काबिल भी नहीं। फर्क प� read more >>
मां एक स्वप्न है जो साथ होती है पर नहीं होती मां एक सतह है जिससे उभरा है मेरा वजूद मां एक परछाई है जो शामिल है मुझ में मां जो कुछ है तु� read more >>
कदम से कदम, मिला कर चलो। जेडीयू का झंडा, लेकर चलो। कौंग्रेस मुक्त , भारत बना कर रहो।।।।। read more >>
कविता - जीवन है अनसुझी पहेली हे! मां आकर मुझे बताओ यह मुझे समझ ना आए क्यों? सब क्यों उलझा उलझा लगता यह कोई ना समझाए क्यों? पूछो पूछो पु� read more >>
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