मुहोब्बत का एक अलग ही सुरूर है, मिया
जिसे मिल जाय बो मगरूर है।
जिसे छोड़ दे वो गम में चूर है।
नये आशिको के लिए इस में नूर है।
जो हर एक से म� read more >>
हम कौन थे.....
कहां पर रहे हैं कहा जा रहे हम।
पश्चात सभ्यता में पलते जा रहे हम।।
यहीं के जगत गुरु थे सारे जहां के ।
वेदों की ज्ञान गंगा बह read more >>
कविता ( गिला )
रब से न कोई गिला !
जो मिला सही मिला !!
फ़क़ीरी में, मैं हूँ पला !
फ़क़ीरी का भी हो भला !!
फ़क़ीरी से ही सीखा हूँ !
जीने की हर कला read more >>