दुविधा जो है मेरे अंदर,
किसी और को बतलाना क्या..??
मेरे मन के गहराइयों को जो भांप ना सके,
पल पल उसे समझाना क्या..??
टुक चुके हैं अब दिल अपनो read more >>
हो अगर उससे मुलाकात
दिल की बात बताऊं ....!
गहरे हो चुके हैं जख्म
कहो तो दिखाऊं....!!
दिल के कब्र में छुपे हैं , राज कितने
मिल जाए वो , तो उसे स� read more >>
हस्ती तो बहुत देखी माँ तुझसे ज्यादा सुकून कहीं और कहाँ,
माँ भले ही सो लुंगी मखमल के सेज पर तेरे गोद से ज्यादा आराम कहीं और कहाँ l
माँ ये � read more >>
ये शाम...
उदास है,तन्हा है।
जानती हो क्यों?
क्योंकि, तुम नहीं हो।
ये शाम....
अजीब है, उत्साहहीन है।
रंगहीन और अनुपयोगी है।
जानती हो क्यों?
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नारी वह फूल है जो सबको खुशबू देती है,
नारी वह प्रकाश है जो सबको रोशनी देती है l
नारी एक ऐसी पेड़ है जो सबको छाया देती है,
नारी ऐसी फूल है ज read more >>