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समय से आगे भागना हैं अभी और जागना हैं ! दौड़ के बादल छू लेना हैं अभी एक और आशमा बनाना हैं !! तारों की दुनिया में छा जाना हैं अभी चाँद पे � read more >>
बदल रहा आशमा के रंग भी थोड़ा थोड़ा जैसे लिख रहा अम्बर नाम अदना अदना ! कौन हैं जो स्वर्गलोक में बना रहा रास्ता परिंदो के घर जो उजाड़ रहा थ� read more >>
पूर्ण विवेक वान मानव, प्रबल चेतन शक्ति युक्त। सहज ही- सुख की राशि, अंश है ईश्वर का।। -मोती read more >>
चंचल मन चित वन में कर्म, क्लेश कट गए उम्र तमाम। तब ठहरी उप वन में पिया, संग सुध बुध खो सो रही।। -मोती read more >>
जब मैं निः शब्द हो जाता हूँ, नही सूझता जब कुछ भी तब कलम बोलती है। जब अन्याय की सरगर्मी तेज़ हो, न्याय दबाने के प्रयास हुए तब कलम बोलती read more >>
दुपहरिया- पर कविता तमतमाती चमक लपलपाती लपक लू की गर्म हवाएं बहती दायें बायें छांव भी गर्म पांव भी नर्म जल उठते थे नंगे जब चल� read more >>
प्रकृति के पंचांग में, शरद ऋतु है ख़ास। शुरू होते ही लगाते, अपने-अपने कयास। सजने- संवरने बैठती, लगते कार्तिक मास। धीरे-धीरे खुदरंग मे� read more >>
प्रकृति के पंचांग में, शरद ऋतु है ख़ास। शुरू होते ही लगाते, अपने-अपने कयास। सजने- संवरने बैठती, लगते कार्तिक मास। धीरे-धीरे खुदरंग मे� read more >>
मन की- तृष्णा तड़पती प्यासी, भटकती सारे जहां में हर कुंभ में- छलकता अमृत की धारा बेगाना- खोजता संसार कूप में -मोती read more >>
सिन्दूर पर कविता सिन्दूर के नाम पर क्यों? नारी बंध सी जाती है, अबला बन जाती है तड़प तड़प कर जिंदा ही, मर सी जाती है। सिन्दूर के लज्जा read more >>
किसी की पहचान उसकी सोच से होती है।। 2।। जिसकी नियत सही उसको जन्नत मिलती है। read more >>
स्वर्ग -कविता स्वर्ग कहीं ना और, बसा खुद के अंतर में खोज रहे दिन- रात जिसे हम उस अम्बर में सुख ही है वह स्वर्ग जिसे हम � read more >>
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