मैं ना धुंध हूँ ना राख हूँ,
जिंदगी है मौत से मैं मौत के ही पास हूँ ll
राज से द्रोह है ,
और दंश से मोह है ,
कंटको के बीच हूँ मैं
कंटको का लोभ ह read more >>
रोती छत-सिसकता फर्श
उस घर की टपकती छत ने,
घर के फर्श से कहा होगा-
कि माफ़ करना, हालत अभी बुरी है।
घर के गीले फर्श ने,
हँसते हूए कह दिया हो read more >>