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क्यों भूल गए ढिबरी लालटेन जला के पढ़ना गांव चौपाल बो दरवाजे के चौखट बो बरगद के पेड़ उसका आश्मान से जमीन तक लटकता सोर उसके छाव के निचे � read more >>
चुलबुली धुप तू बिन मौसम बदले बो रुत तू न बिजली तड़के न बादल गरजे बिन मेघ बरसात तू रूप बहु तेरे रंग सतरंगी जैसे नवरंग बसंत तू रंगो क� read more >>
बचपन का सपना सजाने चला हूं। मैं एक घर अब बनाने चला हूं।। प्यार की ईंटों से नींव बनाने को, अपनत्व के गारे से जोड लगाने को। आंधी और तूफान read more >>
कविता -दया करो सूख गयी है ताल तलैया ठप बैठे हैं नदी की नैया चिंगारी सी है दोपहरिया एक बर्तन पानी धरा करो! हम पक्षी पर दया करो read more >>
अतीत की उत्कृष्ट मसला पुराने घाव खुरदने लगे कुछ वादों की झलकियाँ हर छण याद दिलाने लगी काली साये में लिपटा अतीत के आधा अधूरा सच डा� read more >>
कविता -भूख भूख की कामना है मिले रोटियां रहे सम्मान ना या बिके बेटियां भूख की आग जलती है बुझती कहां? इसके आगे ना दिखती है जन्नत जह read more >>
*जमाना बदल गया* देखो हमारा जीवन केसे निकल गया परिवर्तन इतना हुआ कि ज़माना बदल गया।। उसको पकड़ सके न हम फिसलता चला गया ऐसी चली हवा कि read more >>
सुखी रंगों को सबने पुकारा, दु:खी रंगों को किसने पुकारा।। मां अपने बेटे को नौ महीने तक पेट में रखती हैं। उस दु:खी रंगों को किसने पुकारा read more >>
कविता - मेरे स्कूल का दूध (एक घटना) दुःख ही जीवन की कथा रही यह सदा कष्ट की व्यथा रही। कब तक कोई लड़ सकता है! कब तक कष्� read more >>
मैं फूल हूँ काटों से लिपटा रहता हूँ कही भी कही भी हर मौसम में मिलता हूँ मैं कोमल हूँ और नाजुक भी मैं फूल हूँ मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद read more >>
मैं फूल तू काटा फिर भी दोनों आधा आधा तू मुझ से दुखी दुखी फिर भी रक्षा करता हैं मैं कोमल नाजुक कली तू निठुर काटा फिर भी दोनों आधा आध read more >>
मन की चिंता तन की चोट कौन देखेगा किसे दिखाऊ जख्म देने बाला भी अपना अच्छा रह जाना है मौन बदन का भूख जिस्म की प्यास हृदये के पीड़ा समझ� read more >>
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