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आड़ की बाड़
वचन की आड़ कैकयी, मांगी वनवास रघुवर का। महाबलि बालि को मारा, राम ले परदा तरुवर का। इच्छा मृत्यु भी मृत्यु मांगे, परदा शिखंडी तुवर का। स
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नई साल की बधाई
बहुत कुछ सिखाया आपने हमे आते जाते। बार बार लो बिदाई तुम भी अब जाते जाते। अपनों का तुमने रंग दिखा के बताया। सबको एक जैसा सत्य पर है चल�
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अटल बिहारी को प्रणाम!
उबड़ खाबड़ पथरीली राहों पर, जो खूब चले और अटल रहे! उन अटल बिहारी को प्रणाम! उन अटल बिहारी को प्रणाम! राष्ट्रभक्ति और समर्पण को उद्देश्�
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कविता = ( भीड़ )
#माननीयश्रीअटलबिहारीवाजपेई माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के सुशासन दिवस पर उनके चरण कमलों में समर्पित मेरी यह रचना कविता = ( भीड़ )
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जिम्मेदारियां
कविता-जिम्मेदारियां जिम्मेदारियां एक बोझ है ढोने वाले पर लद जाते हैं, ना ढोने वाले को नासमझ/ नालायक/ आवारा लोग कह जाते हैं, जिम्मे�
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डॉ भीमराव अंबेडकर
दलित के घर मे जन्म लिया समाज उसे अछूत कहता था जब घर से बाहर वो निकलता कितना अपमान उनका किया जाता जब वो पढ़
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पथ
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना
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पथ
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना
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औसर
सदियो से चलती आ रही आज भी वह चलती है जिसने बहुतो को लूटा औसर है वह कुप्रथा जब किसी का देहा�
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फुल रुपी जीवन
फूल खिले एक बार खिले ना बारंबार जीवन मिले एक बार मिले ना बारंबार उड़ा सके जितनी गमक फूल खिले एक बार जीवन मिले ना बारंबार ठौर पा सके ए�
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Alive
काश हम भी थोड़े , खुदगर्ज बन जाते समय निकाल कर , अपने लिए भी थोड़ा - सा सोच लेते जिन रिश्तों के लिए , खुद का वजुद ही भूल बैठे थे वो एक पल के
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इसी का नाम है जिंदगी
कहीं जिद पूरी कही जरूरत भी अधुरी कहीं सुगंध भी नहीं कहीं पूरा जीवन कस्तूरी इसी का नाम है जिंदगी लिखना था कि खुश हैं तेरे बगैर भी यहां �
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