कल जैसे थे आज भी वैसे हीं हैं
बस फर्क इतना सा हैं
कल छोटे थे, आज कुछ बढ़े हों गए हैं।
जिन हाथों से उंगलिया थम चला करतें थे।
आज उन हाथों में read more >>
मन के द्वार एक दीप धंरु मैं!
हृदय के तम को दूर करुं मैं!!
हो उजियारा चहूं ओर,
तन को सरावोर करुं मैं!
अटरिया के कमूरे पर दीप धरुं में
आस वि read more >>
कल्पना करते हुए____________
प्रभु धनवंतरी जी को बुलाते हैं
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दीपावली आ गई,चलो मिलकर घर को सजाते हैं,
धन तेरस के दिन, प्रभु धनवंत� read more >>