कविता -कृष्ण बाल लीला
अब आन बसौ मोहन मन में, तेरी सूरत मन को भावत है। बचपन में तू जीवन की सबै, खूब लीला करत दिखावत है।|
ठुमकत चलत बजै पैज� read more >>
हाथ जोड़कर मत खड़े हो तुम,
मेहनत स्वयं कर लिया करो,
पैर बड़ों के छू लिया करो तुम,
सम्मान नारियों का किया करो,
आज किया तो कल भी करना,
सुबह � read more >>