बुलंद ,शहर के दरवाजे पर एक चस्मदीद खड़ा होता है,।
कितनी खोखली है,।यह मिनारें,।
यहाँ नहीं पहुंचती ,इक हवा ,।जो आयी हो गरीबी के भेष में,।
म� read more >>
जब ,मेरे ,देश की बात होती है,।
मेरी ,आंखों में,इक स्वतंत्र ,निश्च्छल किताब होती है,।
बेशक सरहद के उस लहराते तिरंगे से,
मेरी क्षण भर की मुल� read more >>
शीर्षक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
(अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम)
देश के सपूत थे, देश के लिये अटूट थे।
भाई चारे का दिया सन्देश। कर गये ह� read more >>