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**मन* मन चंचल है तुम ये जानो मन की शक्ति को पहचानो । मन की गति का अंत नहीं है ये तुम अपने मन से जानो ।। मन की भाषा समझ सको तो मन से उसका अर read more >>
कविता- कविराज प्रिय से फुलवारी में मिलकर प्रेम की वर्षा, अद्भुत आनंद की अनुभूति करता रसराज। एकांत में किसी दिन डूब जाता गहरी सोच, शब� read more >>
● चन्द्रमणि माधव ● खण्ड प्रारम्भ हिम खण्डों में ज्यों श्वेत जमे, त्यों जमा समर में रणधारी। व्याकुल तुरीण में read more >>
हैं मानव तुम शहर जाकर गांव को कैसे भुल गए तुम भुल गए वो वन और जंगल जहां पर तुम खेलते थे है मानव तुम भुल गए गांव की प्यारी मिट्टी को हैं � read more >>
हैं मानव तुम शहर जाकर गांव को कैसे भुल गए तुम भुल गए वो वन और जंगल जहां पर तुम खेलते थे है मानव तुम भुल गए गांव की प्यारी मिट्टी को हैं � read more >>
**मन* मन चंचल है तुम ये जानो मन की शक्ति को पहचानो । मन की गति का अंत नहीं है ये तुम अपने मन से जानो ।। मन की भाषा समझ सको तो मन से उसका अर read more >>
मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसु मुदतो माँ ने नहीं धोया दुपटा अपना अभी जिन्दा है मेरी माँ मुझे कुछ नहीं होगा लब्बो पर उसके कभी बद� read more >>
देश के लिए मर मिटने की, बलिदानी राह दिखाता शिक्षक || प्रेम सरिता की बनकर धारा, नैया पार लगाता शिक्षक || झटकती है दुनिया हाथ कभी जब, तो झटप� read more >>
तू ही जान है मेरी ऐ जान ले तू तुझसे मेरी दुनियां शुरू तुझपे ही मेरी दुनियां खत्म ऐ पहचान ले तू। धन्यवाद read more >>
है मानव तुम बने ईर्ष्यालु तो जग का कैसे होगा कल्याण । पर कुछ होते है मानव जो ईर्ष्या भाव भी रखते है। जो दूसरे read more >>
शीर्षक (भारतीय सेना) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मिटाने से भी हमारी हस्ती मिटती नहीं, समुंदर में भी हमारी कस्ती नही रूकती। ना विश्� read more >>
वो जो भटक रहा है इंसान कुछ ना करता काम जग मैं कहता है में हु मेहनती सिर्फ आलस का मारा है ईश्वर ने दिया शरीर है read more >>
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