वक़्त ,की ,मुलाकात ,लिख रही हूँ,।
किसी ,से ,अधूरा, रहा ,साथ लिख रही हूँ,।
लिखावट,का तलबगार रहा कलम,।
मैं तो बस अपना इक हाथ लिख रही हूँ,।
कहीं read more >>
मै एक कहानी को कविता का रुप देकर लिख रही हूं।
आशा करती हूं! आप सबको समझ आयेगी!
सुनीता _ जल्दी जल्दी काम निपटा लो!
&nbs read more >>
आज तुमने जो हमसे कहा
देखो कल उसको भूल न जाना
दिल को जो बात आज छू गई
देखो कल दिल तोड़ न जाना
आंखो में जो सपने भर दिए
देखो कल उस सपने को चुर� read more >>
# किताब ....
मैं क्या हूं , कैसा हूं
किसके जैसा हूं ,
जानना चाहोगे जनाब ....?
तब तो ,
पढ़ कर ही मुझे
जान पाओगे आप ....!
मैं तो हूं एक ,
खुली ह� read more >>
# निनाद …..
हे मानव तुमसे
मेरी है
ये विनम्र विनती
है यही मेरी
दिल की निनाद …..!
मानव मस्तिष्क के
एक कोने में
सड़ा सा पड़ा
ये जमा हुआ read more >>
आओ, झूमों, नाचो, गाओ
देखो रुत है सावन की आई
घुँघराली, काली घनघोर बदली
जब आसमान में है छाई
धरती ने भी झूम, झूम कर विरह प्यास बुझाई
सावन की � read more >>