तुम चुप ही रहना
कहने से खुल जाएगा भेद मन का । तुम चुप ही रहना
हंसी ओढ़ लेना, स्मृति में रख लेना, अकेलेपन से लड़ते हुए कभी विचलित न होना
अ� read more >>
इस उम्र का मंजर कुछ ऐसा है,
कि सब कुछ याद रखने वाला मैं अब बहुत कुछ भूलने लगा हूं, छोटी-मोटी परेशानियों से कई दफा झूझने लगा हूं।
शांत रहन� read more >>
सदृण सा इक रिश्ता अब भी निभा रही हूँ ,मैं,।
इस, रिश्ते ,में, बातों का ,दौर खत्म है,।
फिर, भी ,एहसास, न, टूट जाये,।
उम्मीद का आखरी सफर निभा रही � read more >>
आश्चर्य कैसी मुसीबतों में,
देह अभिमानी पड़े हुए हैं,
स्वधर्म अपना भूलकर---
माया के चक्कर में फंसे हुए हैं!
मोह-माया कैसी है यह प्रबल---
म� read more >>