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बस चाहत का ये मंजर खिलाते रह, अरमा रोज नई और सही सजाते रह। तेरे सारे मुरादें हो जाएंगी पूरी, सिर्फ तूं इरादे नेक रख। लाए नही तुम कुछ अपन read more >>
एक बार मेघ आ रही है, तो एक बार धूप आ रहा है। यह आंख_मिचौली का खेल, सुबह से चल रहा है। मुझे लगता आज दोनों में ठनी है, एक दूजे को हराने का, भर� read more >>
बल है_बुद्धि है_विद्या है, सारे जहां के खुशियां भी है। पर जब बात आयेगी, स्मिता रक्षा की तो, कदापि चुप नहीं बैठना है। मान मिला_सम्मान मि� read more >>
Diwsa-diwas badlat ahe.... PAISHYACHYA NANDAT talwalat ahe....... Adi nati apulkichi-adi nati premachi..... Adi nati sukhachi-adi nati dukhachi..... Ata matr PAISHYACHYA NANDAT talwatl ahe...... Adi manus manus manuski japaycha.... Tewha to apulkik asaycha....... Ata matr manus.. PAISHYACHYA NANDAT talwalat ahe... Adi gogat asaycha ap read more >>
बचपन तुम फिर से वापस आ जाओ मुझ पर एक एहसान कर जाओ फिर से तुम मुझ संग प्रीत लगाओ वह बारिश में कागज की नाव चलाओ फिर से मैं नंगे पांव दौड़ read more >>
कोई नहीं है कितनी बार कहा मेरे दिल में कोई नहीं है मग़र तुम हो कि मानते ही नहीं हाँ रोती हूँ , अकेले रहती हूँ, चुप रहती हूँ पर इसका मतल read more >>
न शौक, न श्रृंगार ,न इच्छा न चाह हो, न दु:ख हो न दर्द हो,कठिन भले ही राह हो, तेरे बिना रहना कैसा?भाये भला तनहाइयां? बनकर सदा चलता रहूं ,अमिट � read more >>
आज दिन में धूप थी कुछ तेज ज़्यादा क्यों ? कदाचित... धूप के ये सूक्ष्म कण मानों पसीने के कणों से मिल बने कुछ खेत में, कुछ कारखानों में तथा � read more >>
शीर्षक- बढ़ते कदम मुसाफिर! तान ले यदि तीर अपना मंजिल की ओर सोंचकर उम्मीदों पर खरे उतर रहे हम , दुनिया तुम्हारा नाम क्यों याद � read more >>
रात को अकेले में ये विचार करता हूँ क्या मैं आज बचपन के उन ही बंदरों सा हूँ।। रोज़ खेलते, कूदते और साथ पिटते थे दूध से बनी रबड़ी पे दो ह� read more >>
कई जन्मों का आज संगम करेंगे, विचार और मंथन करेंगे, आर और पार की लड़ाई करेंगें, जीत का बिगुल फुकेंगें। ना कोई हम से टकराना, हम हैं खतरना� read more >>
न मिला वह कंधा, बैठ दुनिया देखने की। न वह अंगुली, पकड़ गलियां घुमने की। न मिला स्नेह उसका गलतियों में राह दिखाने की । कह गए बिच राह, छो� read more >>
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