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जिन्दगी का सफर
ज़िन्दगी का सफर सफ़र यह बहुत ही है रोमांचक, फूलों की बगिया सी । बहुत ही सुन्दर और है लाजवाब, चारों दिशाओं में संबंधियों का, अप�
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फिर हौसला
जिस मोड़ पर सब लूट जाता है। अपना भी पराया हो जाता है। उस मोड़ से भी हम गुजरे हैं_ फिर हौसला ही साथ दे जाता है।। (स्वरचित मौलिक)
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कौन आया है
अरे! कौन आया है हरियाली की चादर ओढ़े टीसू रंग में रंगे अधर महक वादियों के खुशबू से जो तन मन में आ रही उतर, पीले सरसो के कुमकुम से सजी अ
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किसान महान
कविता रघुवीर सिंह पंवार धूप में तपता, धरती का लाल, हाथ में हल, आँखों में सवाल। हर बूँद पसीने की, बनती मोती, खेती करता, सजाता अपनी ओटी। �
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बारिश और बचपन की याद,
बारिश की बूंदों को देख, मन कितना आनंदित हो जाता हैं l और उन बूंदों में मन , ये भीगने को चाहता हैं l रोक नहीं पाती हूँ मैं ख़ुद को , जब बार�
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अपनापन
अपना बना के तो देखो। दिल दे के तो देखो। नजरें मिला के तो देखो। मेरी सूरत तेरे आईना में, नज़र आएगी। अपना बना के तो देखो। सपना स�
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ऊंट और झूठ
थमा न थमेगा, ऊंट, झूठ का चक्का। मौका़ मिलने पर दोनों, लंबा मारते छक्का। ऊंट, झूठ अंत में, दोनों भागते मक्का। पकड़ा पथ छोड़े नहीं, कच�
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मानसून
मानसून घनघोर गर्जन करते हुए, मोतियों की झालरों से सजे हुए, बादलों के मतवाले सवारी पर सवार, नभ में विद्युत की जगमगाहट के साथ, छ�
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तुम चाहो तो कर सकते हो
तुम चाहो तो कर सकते हो लक्ष्य....जो तुमने ठना हैं गमला तोड़ निकलना होगा यदि पेड़ बनाकर तुम्हें दिखाना हैं माना ये आसान नहीं है नामुम
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जाना खाली हाथ
*कविता* *जाना खाली हाथ* मुठ्ठी बांध कर आये हैं जाना खाली हाथ संग नहीं कुछ जाएगा छूट जाएगा साथ। जिंदगी भर हम सब यहां करते हैं खूब
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प्रीति _ प्रीति
प्रीति_प्रीति प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन �
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संसार की दुश्चिंताओं को
संसार की दुश्चिंताओं को क्यों तोड़ रही आशाओं को खुल कर जीने का दंभ है मेरा फिर अकुलाहट क्यों बाधाओं को। ये समर मेरा अपना है रूक कर क�
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