Radheshyam Joshi 26 Dec 2025 कविताएँ समाजिक 10007 0 Hindi :: हिंदी
आपसे पहले जन्मी मैं, और आपको पाला-पोसा। जब बढ़ रहा था मरूस्थल, तो मैंने ही उसे रोका। आज मैं छोटी हो गई, और तुम हो गए बड़े !! आंधियों को अपनी छाती पर रोक, तुम्हारे लिए बारिश भेजी मैंने। क्या नहीं दिया मैंने? नदियां, नाले, झरने, एक प्रकृति का दुलार। इतिहास, संस्कृति और पूरा संसार। - राधेश्याम जोशी कोहिणा