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राग विरागिनी

Anjani pandey (sahab) 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत ###प्यार की गहराई में डूबती इस्त्रिया## 50226 0 Hindi :: हिंदी

                 " राग - विरागिनी"

        मन है चंचल 
                      मन है विहवल
एक प्रेम रागिनी फिरती है
                     मन में पीड़ा लिए हुए 
राग- विराग में चलती है....
                       नहिं चाह उसे अब उसकी
नहिं राह अब निहारती है
                सांस कब अब रुक जाए
आ जाओ तुम 
               आस यही अब रहती है 
मन में पीड़ा लिए हुए 
                    राग -विराग में चलती है....
जो घनीभूत पीड़ा थी 
                  आंसू बनकर बह गए वह
हाड़ मांस की काया भी 
                    कंकाल बन कर रह गए वह
प्रेम न कम होने पाए 
                     विरह वेदना कहती है 
मन में पीड़ा लिए हुए
                      राग-विराग में चलती है....

      अंजनी पांडेय साहब

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