Nihal singh 24 Dec 2025 ग़ज़ल अन्य #ग़ज़ल #शायरी #दर्द #मोहब्बत #समाज #हकीकत #निहाल 15058 3 5 Hindi :: हिंदी
मिज़ाज था तल्ख़ पर उससे आहिस्ता कहना पड़ा मैं था मुज़फ़्फ़र मगर ख़ुद को सिकस्ता कहना पड़ा मैंने किया था दावा ताउम्र साथ रहने का इस मआशरे के आगे ख़ुद को पस्ता कहना पड़ा जिसे अज़लो से चाहा ख़्वाबो-हक़ीक़त में उसे रक़ीब से ही पैवस्ता कहना पड़ा हंगामा बहुत था उसके हर एक आस-पास दिल का जो हाल था कानों में आहिस्ता कहना पड़ा उसे चाहिए था साथ किसी और अजनबी का तो मुझे भी आख़िर ख़ुद को सरगस्ता कहना पड़ा यूँ तो तुम भी बड़े मौलाइ हो निहाल मगर उनके आगे तुम को खस्ता कहना पड़ा