वो रात —
जो भूखे बच्चों की आँखों में ठहरती है,
किसी मुर्दे की तरह हर साँस पे बिखरती है,
जहाँ माँ अपनी ही भूख को दुआ कहती है,
और रोटी —
कफ़� read more >>
आज की सुबह दिनेश के लिए नासूर बनकर उगी थी।
वह अब भी अपने बिस्तर पर लेटा था। आँखें खुली थीं, पर उनमें उठने का कोई इरादा नहीं था—
मानो रात � read more >>