Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

Nihal singh

Nihal singh

Nihal singh

@ nihal-singh-singh
, Rajasthan

“अलफ़्ज़ों से हालात का सामना करता हूँ।”

  • Followers:
    6
  • Following:
    2
  • Total Articles:
    17
Share on:

My Articles

वो रात — जो भूखे बच्चों की आँखों में ठहरती है, किसी मुर्दे की तरह हर साँस पे बिखरती है, जहाँ माँ अपनी ही भूख को दुआ कहती है, और रोटी — कफ़� read more >>
अगर वक़्त इंसान होता… अगर वक़्त इंसान होता, तो मैं उससे यूँ ही नहीं मिलता— मैं एक मुक़दमे की तरह उसके सामने अपना दर्द रखता। कहता— “� read more >>
तन्हाई के आलम में साथ रहने की बात करते हो, मैंने कब तुमसे रूह का साथ माँगा था—तुम कमाल करते हो। आओ तुम्हें मिलाऊँ उन चंद लम्हों के हम� read more >>
तुम ज़िन्दगी से चली गई — फिर ये ख़लिश थमी क्यों नहीं, अश्क रुक गये हैं मगर साँस रुकी क्यों नहीं। दिल को यूँ बिखेर गई वो बिना शोर के, आ� read more >>
# अँधेरा ओढ़े लोग | दर्द, सच और तन्हाई पर एक ग़ज़ल *यह ग़ज़ल उस सन्नाटे की कहानी है, जहाँ दर्द बोलता नहीं — बस भीतर जलता है। जहाँ सच अक् read more >>
रात का समय था। वीरानपुर गाँव की हवाओं में एक अजीब-सी खामोशी घुली हुई थी। दूर पहाड़ी पर खड़ा पुराना ठाकुर हवेली का खंडहर चाँदनी में किस� read more >>
आरव एक मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का था। उसकी दोस्ती एक अमीर परिवार के लड़के, समर, से थी। वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानता था कि उसे राह दि read more >>
सोमवार की सुबह थी। स्कूल की घंटी रोज़ की तरह बजी, लेकिन आज विकल्प के भीतर कुछ अलग ही बज रहा था। आज वह किसी सवाल से नहीं, एक निर्णय से स� read more >>
आज की सुबह दिनेश के लिए नासूर बनकर उगी थी। वह अब भी अपने बिस्तर पर लेटा था। आँखें खुली थीं, पर उनमें उठने का कोई इरादा नहीं था— मानो रात � read more >>
हमारी ज़िंदगी को ख़ाक और बर्बाद कर दिया, हाँ, ये वही लोग हैं जिन्होंने अपनी नज़र में देश को आबाद कर दिया। बहुत बरसों से चली आ रही थी यह� read more >>
Join Us: